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Questions and Answers

अपभ्रंश साहित्य के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  • अपभ्रंश साहित्य मुख्य रूप से इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित है। (correct)
  • इसका साहित्य कालिदास की रचनाओं में भी पाया जाता है।
  • इसे अक्सर भाषाकाव्य कहा जाता था।
  • जैन ग्रंथों से इसकी रचनाओं के बारे में जानकारी मिलती है।

पहले अपभ्रंश साहित्य की उपलब्धता के बारे में क्या धारणा थी?

  • यह साहित्य लगभग लुप्त माना जाता था। (correct)
  • यह साहित्य मुख्य रूप से लोक कथाओं में ही सीमित था।
  • यह साहित्य बहुत व्यापक रूप से उपलब्ध था।
  • यह साहित्य केवल शाही दरबारों में पाया जाता था।

जैन ग्रंथों में अपभ्रंश साहित्य का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  • धार्मिक सिद्धांतों का विवेचन करना। (correct)
  • सामाजिक सुधारों का प्रचार करना।
  • ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन करना।
  • साहित्यिक सौंदर्य का प्रदर्शन करना।

हजारीप्रसाद द्विवेदी ने 'हिंदी साहित्य की भूमिका' में अपभ्रंश की किन रचनाओं का उल्लेख किया है?

<p>पुष्पदन्तकृत तिसट्टलक्यण-महापुराण और मयंभू कृत पउमचरिउ (C)</p> Signup and view all the answers

अपभ्रंश साहित्य के विकास के संदर्भ में जैन ग्रंथों का क्या महत्व है?

<p>इनमें अपभ्रंश की संरचना और काव्य रूपों के बारे में विस्तृत जानकारी सुरक्षित है। (C)</p> Signup and view all the answers

निम्नलिखित में से कौन अपभ्रंश के प्रमुख कवियों में से एक नहीं है?

<p>तुलसीदास (B)</p> Signup and view all the answers

अपभ्रंश के वैयाकरण कौन थे, जिनका जैन धर्म से भी संबंध था?

<p>हेमचंद्र (A)</p> Signup and view all the answers

अपभ्रंश साहित्य में 'संदेशरासक' किस प्रकार की रचना है?

<p>प्रेम काव्य (B)</p> Signup and view all the answers

अपभ्रंश साहित्य की पांडुलिपियाँ मुख्य रूप से कहाँ पाई गईं?

<p>जैन भंडारो में (B)</p> Signup and view all the answers

अपभ्रंश साहित्य के अध्ययन से हमें किस अध्याय का ज्ञान मिलता है?

<p>भाषा और साहित्य के विकास का एक पूरा अध्याय (D)</p> Signup and view all the answers

प्राकृ तपंगलम् मं ऄपभ्रंश कहिताओ ंको कस रूप मं संकहलत ककया गया है?

<p>उदाहरण (C)</p> Signup and view all the answers

संदेशरासक कसकी रचना है औि आसकी प्राकृ तत कैसी है?

<p>अब्दुलरहमान, धिहकाव्य (A)</p> Signup and view all the answers

बौद्ध गान ओि दोहाकोश के संपादन का कायय कसने ककया?

<p>पदडत हिप्रसाद शास्त्री (A)</p> Signup and view all the answers

बौद्ध गान ओि दोहाकोश मं संकहलत दोहो ंकी भाषा के बारे मं कौन-सा कथन सही है?

<p>आसमें ऄपभ्रंश के साथ पूिवी भाषाओ ंके चचह्न भी हमलते हं (C)</p> Signup and view all the answers

बौद्ध धमय के ककस संप्रदाय मं तंत्र-मंत्र का बोलबाला था?

<p>सहजयान औि ििियान संप्रदाय मं (D)</p> Signup and view all the answers

हसद्धो ंके संदभय में, 'काया-योग, सहज-शून्य की साधना' ककससे संबंचधत हं?

<p>हिषय-वस्तु (B)</p> Signup and view all the answers

निम्नलिखित मं से कौन-सा नाम ऄपभ्रंश के हसद्धं मं शाशमल नहीं है?

<p>तुलसीदास (C)</p> Signup and view all the answers

ऄपभ्रंश काव्य के रूपबंध का हिंदी साहहत्य पर क्या प्राभाि पड ा?

<p>रूप-रूपांतरं मं विरासत की तरह प्राप्प्त हुए (B)</p> Signup and view all the answers

हहिंदी भाषा के विकास की यात्रा में अन्य भाषाओं के योगदान को समझने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

<p>हिंदी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास को समझना। (A)</p> Signup and view all the answers

हहिंदी साहित्य के निर्माण में हिंदी से पूर्व के साहित्य की भूमिका से परिचित होने का क्या लाभ है?

<p>साहित्यिक इतिहास की निरंतरता और विकास को समझना। (B)</p> Signup and view all the answers

किस घटना ने हिंदी साहित्य में भाषा, विचार और दर्शन के क्षेत्र में हलचल पैदा की?

<p>भारत के उत्तर-पश्चिम सीमांत से विजय प्राप्त इस्लामी आक्रमण। (A)</p> Signup and view all the answers

महत् परंपराएँ लोकग्राह्य होने के क्रम में किस प्रक्रिया से गुजरती हैं?

<p>वे लोकभाषा में समाहित होकर रूप बदलती हैं या छूट जाती हैं। (D)</p> Signup and view all the answers

लघु परंपराएँ साहित्य रचना के माध्यम से क्या प्राप्त करती हैं?

<p>स्थायित्व और प्रतिष्ठा। (B)</p> Signup and view all the answers

बौद्ध, जैन और ब्राह्म विचार और दर्शन किस भाषा से छनकर पुरानी हिंदी में अभिव्यक्त हुए?

<p>संस्कृत, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश। (A)</p> Signup and view all the answers

महत्परम्परा का संबंध समाज के किस वर्ग से है?

<p>सुशिक्षित, मननशील और चिंतनपरायण विशिष्ट जन। (C)</p> Signup and view all the answers

महत्परम्परा समाज में किसकी भूमिका निभाती है?

<p>मार्गदर्शन देने वाले दीपक की। (C)</p> Signup and view all the answers

लघु परम्परा, महत्परम्परा से किस प्रकार जुड़ी होती है?

<p>यह महत्परम्परा से ही जुड़ी होती है और उसे लोकविश्वासों में अभिव्यक्त करती है। (A)</p> Signup and view all the answers

हिंदी साहित्य का आदिकाल किस ऐतिहासिक कालखंड के बीच का समय है?

<p>मध्यकाल। (B)</p> Signup and view all the answers

हिंदी साहित्य के आदिकाल को 'आदिकाल' क्यों कहा जाता है, जबकि इसके पीछे चिंतन और सृजन की हजार वर्ष की ऐतिहासिक पीठिका मौजूद है?

<p>क्योंकि यह हिंदी भाषा के आरंभिक स्वरूप की साहित्यिक स्वीकृति और प्रतिष्ठा का काल है। (B)</p> Signup and view all the answers

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन महत्परम्परा के सन्दर्भ में सही है?

<p>यह समाज के शिक्षित और चिंतनशील वर्ग से संबंधित है। (A)</p> Signup and view all the answers

हिंदी साहित्य के आदिकाल में किस भाषा को साहित्यिक मान्यता और प्रतिष्ठा मिली?

<p>तत्कालीन लोकभाषा (पुरानी हिंदी)। (A)</p> Signup and view all the answers

लघु परंपराएँ महत्परंपरा से जुड़कर किस रूप में अभिव्यक्त होती हैं?

<p>लोकविश्वासों, संस्थाओं, लोककथाओं, कहावतों और पहेलियों के रूप में। (C)</p> Signup and view all the answers

हिंदी साहित्य के आदिकाल की एक महत्वपूर्ण विशेषता क्या है?

<p>यह तत्कालीन लोकभाषा के साहित्यिक स्वरूप की स्थापना का काल था। (B)</p> Signup and view all the answers

आचायष हजारीप्रसाद हििेदी के अनुसार, तांह्त्रकं का 'अगम' शब्द ककस भाषा से अए हुए 'अचार' का ऄथष देता है?

<p>बाहरी (A)</p> Signup and view all the answers

मध्यदेश की सांमकृ हतक मिष्यादाओ ंके कारण बौद्ध मठं के ईठ जाने के बाद क्या शेष रह गया?

<p>पूजा-साधना की हिहधयाँ (A)</p> Signup and view all the answers

महायान के प्रभाि से धमषसम्मत लोकव्यिहार मं कौन सी बातं शाहमल हुईं?

<p>ये सभी (C)</p> Signup and view all the answers

शंकराचायष की मथापनाओं और व्याख्याओं के बाद पुनरुज्जीहित ब्राह्मण-धमष मं ककस की संकल्पना शाहमल हो चुकी थी?

<p>बौद्ध-धमष की ‘शून्य’ की (C)</p> Signup and view all the answers

बौद्ध-धमष के मूल ईपदेश ककस भाषा मं थे, पर आस समय तक कौन सी भाषा के ग्रन्थ ऄहधक हिश्िसनीय हो ईठे थे?

<p>पालह, संमकृ त (A)</p> Signup and view all the answers

सहजयान और िज्रयान ककस साधना के रूप मं हिकहसत हुए?

<p>बौद्ध साधना के साथ शैि और शाक्त ईपासनाओं के योग से (D)</p> Signup and view all the answers

ककस सम्प्रदाय के हभन्न हभन्न प्रकृ हत के देिताओं की पूजा भारतीय गृहमथ अज भी करता है?

<p>A और B दोनो (B)</p> Signup and view all the answers

सातिं-अठिं शताब्दी मं पुनरुज्जीहित ब्राह्मण-धमष ककसकी मथापनाओं और व्याख्याओं िारा ऄपना हपछला रूप बहुत कु छ बदल चुका था?

<p>शंकराचायष (B)</p> Signup and view all the answers

महायान ककसके साथ समन्िय के पररणाममिरूप बौद्ध-श्रमण-परम्परा मं नया अयाम था?

<p>हहन्दू धमष (A)</p> Signup and view all the answers

शंकराचायष को ककसका समन्िय के पररणाममिरूप प्रच्छन्न बौद्ध भी कहा गया था?

<p>बौद्ध-धमष की ‘शून्य’ की संकल्पना (B)</p> Signup and view all the answers

ककसकी सहजता मं लोकमत की प्रधानता से शुरू होकर महायान ईसी मं घुलकर लुप्त हो गया?

<p>अचार-व्यिहार (B)</p> Signup and view all the answers

ककसके अनुसार परमपर हिरुद्ध हिश्िासं और हिचारं का समन्िय भारतीय लोकधमष की ऄपनी हिहशिता है?

<p>अचायष हजारीप्रसाद हििेदी (C)</p> Signup and view all the answers

छठी-सातिं शताब्दी तक संमकृ त के हिशाल भडडार मं से कौन से ग्रन्थ अत्मोपलब्ध ज्ञान और प्रत्यक्ष जीिन के हबचौहलये रह गए थे?

<p>िेदोपहनषद् अदद (C)</p> Signup and view all the answers

हजन ददनं महायान लोकधमष रूप लेता हुअ साधारण जनजीिन मं ऄपनी पैठ बना रहा था, ईन ददनं कौन सा धमष लोक-साधारण से ईत्तरोत्तर ऄलग होता जा रहा था?

<p>ब्राह्मण धमष (B)</p> Signup and view all the answers

भारतीय लोकधमष की हिहशिता क्या है?

<p>परस्पर हिरुद्ध हिश्िासं और हिचारं का समन्िय (D)</p> Signup and view all the answers

आचायष हजारीप्रसाद हििेदी ने मध्यदेश को ककस रूप मं िहणषत दकया है?

<p>चौमुखी संमकृ हतयं से हघरा, रक्षणशील और पहित्रताहभमानी (D)</p> Signup and view all the answers

हहन्दी साहहत्य का आददकाल कब से कब तक माना जाता है?

<p>संित् 1050 से 1375 तक (B)</p> Signup and view all the answers

आचायष रामचन्र शुक्ल ने हहन्दी साहहत्य के हिकास को ककसके सन्दभष मं देखा?

<p>आमलाम के अगमन (D)</p> Signup and view all the answers

आचायष हजारीप्रसाद हििेदी ने हहन्दी साहहत्य के हिकास को ककस रूप मं देखा?

<p>भारतीय हचन्ता के स्वाभाहिक हिकास (C)</p> Signup and view all the answers

हहन्दी साहहत्य की पृष्ठभूहम के ऄध्ययन के दो महत्वपूणष पक्ष कौन से हं?

<p>तात्काहलक पृष्ठभूहम और पूिष-परम्पराए (A)</p> Signup and view all the answers

जातीय मानहसकता का साहहत्य पर क्या प्रभाि होता है?

<p>यह रचना सामग्री और ईत्पादक दोनं है। (D)</p> Signup and view all the answers

मध्यदेश मं ककस चीज का रक्षण बना रहता है, जबदक हिचारं मं गहतशीलता होती है?

<p>आचार-व्यिहार (D)</p> Signup and view all the answers

हहन्दीभाषी राज्यं मं कौन-से राज्य शाहमल हं?

<p>राजमथान, हररयाणा, ईत्तर-प्रदेश (C)</p> Signup and view all the answers

अचायष हजारीप्रसाद हििेदी ने मध्यदेश के बारे मं क्या िहषत दकया है?

<p>यह आहतहास और संमकृ हत का केन्द्र है, जो संरक्षणात्मक परम्पराओ का पालन करता है। (A)</p> Signup and view all the answers

मध्यदेश की सांस्कृहतक हिशेषता क्या है?

<p>यह हवहितापूर्ण संस्कृहतयं का घर है, जो रक्षणशीलता और पहित्रता को महत्व देता है (A)</p> Signup and view all the answers

हहन्दी साहहत्य के आददकाल मं कौन-सी महत्वपूणष घटना घटी?

<p>आमलाम का भारत अगमन (A)</p> Signup and view all the answers

अचायष रामचन्र शुक्यल ने हहन्दी साहहत्य के हिकास पर ककस पहलू पर हििेष ध्यान ददया?

<p>सांस्कृहतक प्रभाि पर (B)</p> Signup and view all the answers

हजारीप्रसाद हििेदी के अनुसार, आमलाम के अगमन का हहन्दी साहहत्य पर क्या प्रभाि पड़ा?

<p>ईसका प्रभाि सीमित था और साहहत्य अपने स्वाभाहिक रूप से हिकहसत होता रहा (D)</p> Signup and view all the answers

हहन्दी साहहत्य की पृष्ठभूहम के ऄध्ययन मं 'भारतीय हचन्ता का स्वाभाहिक हिकास' से क्या ऄहभप्राय है?

<p>भारत की प्राचीन दार्शननक और सांस्कृहतक परम्पराओ का हिकास (A)</p> Signup and view all the answers

हहन्दी साहहत्य पर तात्काहलक पररहमथहतयं का क्या प्रभाि होता है?

<p>यह पररहमथहतयां साहहत्य को प्रभाहवत करती हं, लेदकन जातीय मानहसकता उसे आकार देती है (C)</p> Signup and view all the answers

शौरसेनी और मागधी प्राकृत भाषाएँ हहन्दी साहहत्य के हकन दो हभन्न तत्त्वं का प्रहतहनधित्व करती हैं?

<p>दो भाहषक मूल और संमकार-अचारहविचार। (D)</p> Signup and view all the answers

पश्चिमी अपभ्रंश से कस प्रकार का साहहत्य ईत्पन्न हुअ?

<p>चाण काव्य, ऐहतहाहसक काव्य और नीहत की फुटकर रचनाएँ। (B)</p> Signup and view all the answers

पूिी अपभ्रंश की मुख्य हिशेषता क्या थी?

<p>शामत्र-हनरिेक्ष ईग्र हिचारधारा और पाखंड हिरोध। (C)</p> Signup and view all the answers

आधुहनक भाषाओं के हिकास के संदभष मं अपभ्रंश से क्या हभन्नता पाई जाती है?

<p>आधुहनक भाषाओं मं संमकृ त शब्दं का पुनरागमन हुअ, जबदक अपभ्रंश मं इनकी अनुपहमथित थी या िे तद्भि बन चुके थे। (B)</p> Signup and view all the answers

हहन्दी साहहत्य के आददकाल ने अपभ्रंश से क्या प्राप्त दकया?

<p>हिषयिमतु, संिेदना और भाषागत ईत्तराहधकार (B)</p> Signup and view all the answers

चन्द बरदाइ के संबंध मं क्या सही है?

<p>िे हहन्दी के आददकहि भी हैं और अपभ्रंश के अहन्तम कहि भी। (A)</p> Signup and view all the answers

अधुहनक हहन्दी मं पूिी और पहश्चमी संस्कृहतयं के अयं को कस प्रकार समाहहत दकया गया है?

<p>पहश्चमी अयं की रूहऺढहप्रयता और कमषहनष्ठा के साथ पूिी अयं की भािप्रिणता, हिरोही िृहत्त और प्रेम-हनष्ठा को भी शाणमल दकया गया है। (D)</p> Signup and view all the answers

पूिी अपभ्रंश से हनरगुहनयाँ सन्तं की ईग्र हिचारधारा का हिकास हकस प्रकार हुअ?

<p>शामत्र-हनरिेक्षता, पाखंड हिरोध और सहजशून्य की साधना से। (D)</p> Signup and view all the answers

अधुहनक भाषाओं मं संमकृ त शब्दं का पुनरागमन हकस बात का संकेत देता है?

<p>भाषाओं का अपने मूल की ओर लौटना और अपने ऐहतहाहसक और सांस्कृहतक संबन्धे ंको सुदृढ़ करना। (D)</p> Signup and view all the answers

अपभ्रंश की रचनाएँ कब तक चलती रहं?

<p>पन्द्रहिं-सोलहिं सदी तक (D)</p> Signup and view all the answers

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Flashcards

पाठ का ईद्देश्य

हहन्दी भाषा के ितषमान मिरूप को समझना।

भाषा योगदान

हहन्दी भाषा के हिकास मं ऄन्य भाषाओं का योगदान समझना।

पूिष साहहत्य की भूहमका

हहन्दी साहहत्य की हनर्ममहत मं पूिष के साहहत्य की भूहमका से पररहचत होना।

ऐहतहाहसक प्रिेश

भारतिषष के ईत्तर-पहश्चम सीमान्त से हिजयदृप्त आमलाम का प्रिेश और भाषा मं पररितषन।

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साहहत्य का रुख

साहहत्य का शास्त्रीयता से हटकर लोक की ओर ईन्मुख होना।

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लघु परम्पराएँ

छोटी परम्पराओं का साहहत्य रचना के माध्यम से मजबूत होना।

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दशषनन का समावेश

बौद्ध, जैन और ब्राह्म हिचारं का भाषाओं से हहन्दी मं आना।

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महत्परम्परा

समाज के हशहक्षत और हचन्तनशील िगष से जुड़ा ज्ञान।

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ज्ञान का दीपक

समाज मं मागषदशषन देने िाली ज्ञानराहश।

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लघु परम्परा अहभव्यहि

लोकहिश्िासं, कहाितं और लोककथाओं के माध्यम से अहभव्यक्त।

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हहन्दी साहहत्य

लोक-साहहत्य की तरह देखा जाने िाला हहन्दी साहहत्य।

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अददकाल का समय

मध्यकाल के बीच का समय, हहन्दी साहहत्य का अददकाल।

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भाषा का अरहम्भक मिरूप

हजसे हम अज हहन्दी भाषा के नाम से जानते हं, ईसका आरहम्भक मिरूप।

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साहहहत्यक मिीकृ हत

तत्कालीन लोकभाषा की साहहहत्यक मिीकृ हत और प्रहतष्ठा का अददकाल।

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पररितषन

भाषा, हिचार और दशषन आदद क्षेत्रं मं हलचल और पररितषन।

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प्राकृतपैंगलम्

प्राकृतपैंगलम् में अपभ्रंश कविताएँ उदाहरण के रूप में संकलित हैं।

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संदेशरासक

अब्दुलरहमान की रचना, जो एक विरहकाव्य है।

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बौद्ध गान ओ दोहाकोश

बौद्ध गान ओ दोहाकोश में संकलित दोहों में अपभ्रंश का रूप मिलता है।

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सिद्ध

सहजयान और वज्रयान संप्रदाय के अनुयायी।

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प्रमुख सिद्ध

सरहपा, शबरपा, भुसुकपा, लुइपा आदि सिद्धों में से कुछ प्रमुख नाम हैं।

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सिद्धों के विषय

काया-योग, सहज-शून्य की साधना और समाधि की तन्मयता।

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अपभ्रंश काव्य का प्रभाव

अपभ्रंश काव्य के रूप बाद के हिंदी साहित्य में विभिन्न रूपों में मिलते हैं।

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अपभ्रंश काव्य के रूपबन्ध

अपभ्रंश काव्य में प्रयुक्त विभिन्न छंद और शैलियाँ।

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भाषा काव्य

अपभ्रंश साहित्य को पहले भाषा काव्य कहा जाता था।

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अपभ्रंश के प्रारंभिक स्रोत

पहले, अपभ्रंश साहित्य का मुख्य स्रोत कालिदास के 'विक्रमोर्वशीय', अलंकारशास्त्र, व्याकरण ग्रंथ, और कुछ कथाएँ थीं।

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जैन ग्रंथ

जैन भंडार में जैन धर्म सिद्धांतों पर आधारित कई अपभ्रंश पुस्तकें मिलीं।

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जैन ग्रंथों की विशेषता

जैन ग्रंथों में सिद्धांत विवेचन अधिक और साहित्यिक सौंदर्य कम दिखता है।

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जैन धर्म और अपभ्रंश

यद्यपि हिंदी भाषी क्षेत्र में जैन धर्म का गहरा संबंध नहीं रहा, पर जैन धर्म द्वारा संरक्षित रचनाओं में अपभ्रंश की संरचना सुरक्षित है।

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अपभ्रंश की जानकारी का स्रोत

अपभ्रंश की संरचना और काव्य रूपों के विषय में विस्तृत जानकारी जैन रचनाओं में मिलती है।

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अपभ्रंश के प्रमुख कवि

मयम्भू, पुष्पदन्त, धनपाल, जोइंदु, और मुनि रामसिंह अपभ्रंश के प्रमुख कवि हैं।

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हजारीप्रसाद द्विवेदी और जैन रचनाएँ

आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने कई जैन रचनाओं का उल्लेख किया है, जिनमें 'पुष्पदन्तकृत तिसट्ठलक्यण-महापुराण' और 'मयम्भू कृत पउमचरिउ' शामिल हैं।

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हेमचंद्र

हेमचंद्र भी एक जैन आचार्य थे और अपभ्रंश के व्याकरणिक नियमों के विशेषज्ञ थे।

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सहजयान और वज्रयान

बौद्ध साधना, शैव और शाक्त उपासनाओं के योग से विकसित तंत्र साधना।

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नामजप

मंत्रों का जाप करना।

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अवतारवाद

ईश्वर का धरती पर मनुष्य रूप में अवतार लेना।

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भारतीय लोकधर्म की विशेषता

परस्पर विरोधी विश्वासों और विचारों का मिश्रण।

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पूजा-साधना की विधियाँ

बौद्ध मठों के उठ जाने के बाद बची पूजा-साधना की विधियाँ।

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महायान की परिणति

महायान का आचरण में आसानी से घुलमिल जाना और लोकमत को प्राथमिकता देना।

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पुनरुज्जीवित ब्राह्मण धर्म

शंकराचार्य द्वारा स्थापित और व्याख्यायित ब्राह्मण धर्म का नया रूप।

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शंकराचार्य और बौद्ध धर्म का समन्वय

बौद्ध धर्म की 'शून्य' की अवधारणा का समावेशन।

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सर्वभूत-हितवाद

महायान के प्रभाव से धर्मसम्मत लोक व्यवहार में शामिल बातें।

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जीवोद्धार में विश्वास

जीवों को बचाने और उनके लिए कष्ट सहने की प्रवृत्ति।

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बोधि सत्त्व

मनुष्य अपने सत्कर्मों और भक्ति से मुक्त हो सकता है।

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बुद्धगण

ईश्वर काल और देश की सीमा में व्याप्त भी हैं और लोकोत्तर भी।

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भौतिक जगत की प्रकृति

भौतिक जगत नाशवान और सारहीन है।

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कर्मकांड और तंत्र-मंत्र

कर्मकांडों की अधिकता और तंत्र-मंत्र में विश्वास का उदय।

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महायान की विशेषताएँ

महायान सहज मानवीय, लोकगम्य और समन्वयमूलक था।

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मध्यदेश क्या है?

आधनुक भारत मं हहंदीभाषी राज्यों का समूह, हजसमं राजसथान, हररयाणा, ईत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश और हबहार शाहमल हं।

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मध्यदेश की संसकृहत कैसी है?

िह चौमुखी संसकृहतयं और हिहभन्न प्रकहतयं से हघरा हुअ है, रक्षणशील और पहित्रताहभमानी होता है।

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हहंदी साहहत्य का अददकाल कब से कब तक था?

मध्यकाल मं संित् 1050 से 1375 तक का समय अददकाल कहलाता है।

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आमलाम का भारत आगमन कसने प्रभाि डाला?

आमलाम के भारत आगमन का भारतीय साहहत्य पर गहरा प्रभाि हुअ।

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हहंदी साहहत्य मं पररितषन का मुख्य कारण क्या था?

आमलाम के आगमन को हहंदी साहहत्य मं पररितषन का कारण माना जाता है।

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रामचन्र शुक्यल ने हहंदी साहहत्य को कैसे देखा?

अचायष रामचन्र शुक्यल ने हहंदी साहहत्य के हिकास को आमलाम के अगमन की सापेक्षता मं देखा।

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हजारीप्रसाद हििेदी का योगदान क्या था?

अचायष हजारीप्रसाद हििेदी ने परम्परा को रेखांदकत दकया और टू टी हुइ कहड़यं को जोड़ा।

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हजारीप्रसाद हििेदी का क्या मत था?

हजारीप्रसाद हििेदी का मानना था दक आमलाम के न आने पर भी हहंदी साहहत्य िैसा ही होता।

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साहहत्य की रचना कसे होती है?

साहहत्य की रचना समसामहयक प्रभािं और दबािं के भीतर होती है।

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जातीय मानहसकता का क्या कायष है?

जातीय मानहसकता साहहत्य को रचती और अहभव्यक्त करती है।

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जातीय मानहसकता की दोहरी भहूमका क्या है?

जातीय मानहसकता रचना सामग्री और ईत्पादक दोनं है।

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पृष्ठभूहम का ऄध्ययन क्या है?

पृष्ठभूहम का ऄध्ययन आमलाम के भारत-प्रिेश से पहले की परम्परा का ऄध्ययन है।

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भारतीय हचन्ता का मुख्य तत्व क्या है?

भारतीय हचन्ता का मिाभाहिक हिकास।

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साहहत्य और समाज का कसा सम्बन्ि है?

साहहत्य समाज से प्रभाहित होता है और ईसे प्रभाहित करता है।

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जातीय मानहसकता का गठन कैसे होता है?

परम्पराएँ जातीय मानहसकता का हनमाषण करती हं।

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हहन्दी की पूिषिती प्राकृतें क्या हं?

हहन्दी की पूिषिती प्राकृतें, पहश्चमी हसरे पर शौरसेनी और पूिी हसरे पर मागधी हं।

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शौरसेनी और मागधी हं क्या?

ये भाहषक मूल और संमकार और अचार-हिचार को ऄहभव्यक्त करने िाले साहहत्य हं।

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पहश्चमी ऄपभ्रंश से क्या अया?

पहश्चमी ऄपभ्रंश से चारण काव्य, एहतहाहसक काव्य और नीहत की रचनाएँ अईं।

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पूिी ऄपभ्रंश से क्या ईत्पन्न हुअ?

पूिी ऄपभ्रंश से सन्तं की हिचारधारा, पाखडड हिरोध और भहक्तमूलक रचनाएँ ईत्पन्न हुईं।

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हहन्दी मं दोनं अयं क्या हं?

हहन्दी मं पहश्चमी अयं की रूहऺढहप्रयता और कमषहनष्ठा और पूिी अयं की भािप्रिणता शाहमल हं।

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अधुहनक भाषाओं मं क्या बदला?

अधुहनक भाषाओं मं संमकृ त शब्दं का पुनरागमन हुअ, जबदक ऄपभ्रंश मं िे अनुपहमथत थे।

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कौन सी भाषाएँ संमकृ त प्रचुर हं?

हहन्दी, मराठी, बँगला, गुजराती संमकृ त प्रचुर भाषाएँ बनं।

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अददकाल ने पीछे से क्या पाया?

हहन्दी साहहत्य के अददकाल ने ऄपनी पृष्ठभूहम से हिषयिमतु और संिेदना पाई।

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अददकाल के प्रमुि कहि कौन थे?

अददकाल के मूधषन्य कहि चन्द बरदाइ हहन्दी के अददकहि हं और ऄपभ्रंश के ऄहन्तम कहि भी।

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ऄपभ्रंश कब तक चली?

ऄपभ्रंश की रचनाएँ पन्रहिं-सोलहिं सदी तक चलती रहं।

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Study Notes

विषय: हिन्दी साहित्य का इतिहास: पृष्ठभूमि

  • यह पाठ हिन्दी भाषा के वर्तमान स्वरूप और विकास में अन्य भाषाओं की भूमिका को समझने में मदद करेगा।
  • यह हिन्दी साहित्य के निर्माण में पूर्व साहित्य के योगदान को भी स्पष्ट करेगा।

प्रस्तावना

  • हिन्दी भाषा और साहित्य का निर्माण भारतवर्ष के उत्तर-पश्चिम सीमांत से विजयदृप्त इस्लाम के प्रवेश के साथ शुरू हुआ।
  • इस समय में, भाषा, विचार, दर्शन में परिवर्तन हुए और साहित्य शास्त्र से लोक की ओर उन्मुख हुआ।
  • महत् परम्पराएं लोकग्राह्य होने के लिए लोकभाषा में समाहित हुईं, जबकि लघु परम्पराएं साहित्य रचना के माध्यम से प्रतिष्ठित हुईं।
  • बौद्ध, जैन और ब्राह्म विचार और दर्शन पुरानी हिन्दी में अभिव्यक्त हुए और देशकाल के सन्दर्भ में विकसित हुए।
  • महत्परम्परा सुशिक्षित और चिंतनशील वर्ग के साथ है, जो सांस्कृतिक ज्ञानराशि के विश्लेषण और सर्जन में समर्थ है और समाज को मार्गदर्शन देती है।
  • लघु परम्परा लोकविश्वासों, संस्थाओं और लोककथाओं के माध्यम से लोकसाहित्य का निर्माण करती है।
  • हिन्दी साहित्य को आदिकाल से ही एक प्रौढ़ और पुष्ट लोक-साहित्य के रूप में देखा जा सकता है।
  • हिन्दी साहित्य का आदिकाल मध्यकाल के बीच का समय है, जो तत्कालीन लोकभाषा की साहित्यिक स्वीकृति और प्रतिष्ठा का काल है।

मध्यदेश: हिंदीभाषी भूभाग

  • आज के भारत में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार हिंदी भाषी राज्य हैं।
  • प्राचीनकाल में मध्यदेश के नाम से जाना जाने वाला यह क्षेत्र विभिन्न संस्कृतियों से घिरा हुआ है।
  • हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार, मध्यदेश चौमुखी संस्कृतियों से घिरा हुआ रक्षणशील और पवित्रताभिमानी है।
  • विभिन्न संस्कृतियों के कारण यहां वैचारिक गतिशीलता और अन्य धर्मों के लिए सहनशीलता है।
  • मध्यदेश में हिन्दी साहित्य का आदिकाल संवत् 1050 से 1375 तक घटित हुआ, जिसमें इस्लाम का भारत में आगमन एक महत्त्वपूर्ण घटना थी।
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के विकास को इस्लाम के आगमन के संदर्भ में देखा।
  • हजारीप्रसाद द्विवेदी ने इसे भारतीय चिंतन के स्वाभाविक विकास के रूप में देखा, भले ही इस्लाम न भी आया होता।

श्रमण-परम्परा तथा ब्रह्म-चिन्तन-परम्परा

  • प्राचीन बौद्ध तथा जैन धर्मग्रन्थों से श्रमण परम्पराओं का आगमन हुआ।
  • इसमें विरक्तिप्रधान बौद्ध और जैन परम्पराएँ और उनका करुणापुष्ट धर्म शामिल है।
  • ये निरीश्वरवादी परम्पराएँ वैदिक कर्मकाण्ड और बलि-परम्परा के विरुद्ध थीं।
  • ब्राह्मण परम्परा वेद, उपनिषद और स्मृतियों से संबंधित है और ब्रह्म को मोक्ष का आधार मानती है।
  • शंकराचार्य के अद्वैत मत की स्थापना से ब्राह्मण धर्म का पुनरुज्जीवन हुआ।
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास इन दोनों जीवनदृष्टियों के उलझने- सुलझने-समन्वित होते रहने का इतिहास है।
  • ईसा की सातवीं शताब्दी तक बौद्ध धर्म प्रबल था, जो हीनयान और महायान में विभाजित हो गया।
  • महायान जनसाधारण के साथ सम्पृक्त होकर सहजयान और वज्रयान में विकसित हुआ।

आचार-विचार की सहजता और कट्टरता का अभाव

  • महायान शाखा की व्यापक सत्ता में सहायक हुआ।
  • मौर्य सम्राट अशोक के प्रयत्नों से बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार ई.पू. वर्षों में ही आरम्भ हो चुका था।
  • बौद्ध साधना के साथ शैव और शाक्त उपासनाओं के योग से सहजयान और वज्रयान तन्त्रसाधना के रूप में विकसित हुए।
  • परवर्ती शास्त्र-निरपेक्ष सन्त-साहित्य पर नामजप और बौद्ध तत्त्ववाद के निशान दिखाई देते हैं।
  • अवतारवाद की शास्त्र-सापेक्ष भावधारा के भक्तों पर भी महायान का प्रभाव पड़ा। परस्पर विरुद्ध विश्वासों और विचारों का ऐसा समन्वय भारतीय लोकधर्म की अपनी विशिष्टता है।
  • आचार्य द्विवेदी के अनुसार, भारतीय गृहस्थ आज भी परस्पर विरोधी मतों को मानने वाले साधुओं और भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों के भिन्न भिन्न प्रकृति के देवताओं की पूजा करता है।
  • मध्यदेश के सांस्कृतिक स्वभाव के अनुकूल आचार-व्यवहार की रक्षणशीलता के चलते बौद्ध मठों के उठ जाने के बाद भी पूजा-साधना की विधियाँ शेष रहीं
  • महायान अपने आचार-व्यवहार की सहजता में लोकमत की प्रधानता के कारण उसी में घुलकर लुप्त हो गया।
  • ब्राह्मण धर्म लोक-साधारण से उत्तरात्तर अलग होता जा रहा था।
  • पुनरुज्जीवित ब्राह्मण-धर्म शंकराचार्य की स्थापनाओं और व्याख्याओं द्वारा अपना पिछला रूप बहुत कुछ बदल चुका था।
  • बौद्ध-धर्म की 'शून्य' की संकल्पना उसमें शामिल हो चुकी थी। इस समन्वय के परिणामस्वरूप शंकर को प्रच्छन्न बौद्ध भी कहा गया था।
  • महायान के प्रभाव से धर्मसम्मत लोकव्यवहार में सर्वभूत-हितवाद और जीवोद्धार में विश्वास शामिल हुए।
  • बुद्ध (लोकव्यवहार में ईश्वर) में विश्वास अटूट था और नामजप से निर्वाण का आश्वासन था।

संस्कृत साहित्य

  • साहित्य और चिंतन पर महायान का प्रभाव वैचारिक था।
  • आलोच्य प्रदेश और काल में सामाजिक जीवन में आचार-व्यवहार का मेरुदण्ड स्मार्त्त विचार बना रहा।
  • संस्कृत ईस्वी सन् के बाद भी संस्कृत चिंतन और सर्जन का माध्यम बनी रही, लेकिन लोकजीवन की भाषा बदल गई।
  • संस्कृत की रचना परम्परा में लोकजीवन के साथ सम्पृक्ति का भाव कम हो गया।
  • आलोच्यकाल की उल्लेखनीय संस्कृत रचनाओं में नागानन्द, अवधूत-गीता, गीतगोविन्द, कथासरित्सागर और बृहत्कथामंजरी शामिल हैं।
  • संस्कृत में मौलिक रचना की बजाय टीका-लेखन की प्रवृत्ति शुरू ज्ञान को परम्परा-सिद्ध ज्ञान से घटकर मानने के कारण हुई।
  • दसवीं शताब्दी के दार्शनिक अभिनवगुप्त ने अपना समस्त मौलिक चिन्तन टीकाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।

प्रामाणिक और शास्त्रोक्त समझा जाना

  • प्रस्थानत्रयी के अलावा सभी आचार्यों के ग्रन्थों को टीका का योग्य सुपात्र मान लिया गया और टीका-दर-टीका की कड़ियाँ बढ़ती गईं।
  • ग्यारहवीं शताब्दी में निबन्ध-साहित्य रचा जाने लगा, जिसमें लोकजीवन से सम्बद्ध बातों का विचार किया गया।
  • संस्कृत इस दौरान रचना की माध्यम-भाषा लगभग नहीं रह गई थी।
  • प्रवृत्ति के मूल में शास्त्र का लोकोन्मुखी रुझान है।
  • आचार्य द्विवेदी के अनुसार 'भारतीय गृहस्थ आज भी विभिन्न मतों को मानने वाले साधुओं की पूजा करता है।'
  • समुदायों और उनकी आचार-परम्पराओं को टीका साहित्य और पुराण-ग्रन्थों में दर्ज किया गया।
  • निबंध-ग्रन्थों से स्मार्त्त-पण्डित भी बौद्ध पण्डितों के समान लोकधर्म की ओर झुकते हुए दिखाई देते हैं।

मध्य देश की भाषा का विकास और रूपांतरण

  • स्वीकृत साहित्यिक हिंदी का दर्जा खड़ी बोली के परिनिष्ठित रूप को मिला हुआ है।
  • अतीत में अलग-अलग समय पर केंद्रीय भाषा की जगह अलग-अलग बोलियों के पास रही है।
  • केंद्रीय भाषा के अलावा, उस प्रदेश में अनेक स्थानीय बोलियाँ प्रचलित हैं, जिनमें ब्रज, अवधी, कौरवी, बुन्देली, बघेली, भोजपुरी, राजस्थानी आदि शामिल हैं।
  • केंद्रीय साहित्यिक भाषा के रूप में किसी बोली का स्वीकृत होना राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक आदि अनेक कारणों से घटित होता है।
  • हिंदी साहित्य के इतिहास में खड़ी बोली के अलावा ब्रज, अवधी और अन्य बोलियों का साहित्य भी यथोचित रूप से सम्मिलित है।
  • हिंदी शब्द का प्रयोग भाषा के नाम के अलावा जाति, प्रदेश और संस्कृति के विशेषण की तरह भी होता आया है।

अपभ्रंश: पुरानी हिंदी

  • सामान्यतः संवत 1050 को हिंदी साहित्य के आरम्भ के रूप में स्वीकार किया जाता है।
  • हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि के अध्ययन के लिए 700-1000 ईस्वी तक का कालखण्ड महत्त्वपूर्ण है, जब पुरानी हिंदी अथवा 'अपभ्रंश' ने विविध साहित्यरूपों में विकसित होकर साहित्यभाषा का स्थान पाया।
  • आधुनिक आर्यभाषाओं में प्राकृतों के रूपान्तर की कड़ी बनी।

व्याकरण

  • अपभ्रंश के संबंध में प्राचीन अलंकारग्रंथों में दो प्रकार के विरोधी मत मिलते हैं।
  • नमिसाधु अपभ्रंश को प्राकृत कहते हैं, जबकि भामह आदि आचार्य इसे प्राकृत से भिन्न मानते हैं।
  • अपभ्रंश के शब्दकोश का अधिकांश प्राकृत से लिया गया है, लेकिन व्याकरणिक गठन आधुनिक भाषाओं के निकट है।
  • अपभ्रंश में संस्कृत और प्राकृत के संज्ञारूपों से विभक्ति-प्रत्यय अलग होते हैं।
  • विशुद्ध भाषाशास्त्रीय दृष्टि से अपभ्रंश को पालि और प्राकृत के बाद माना गया है, जिससे आधुनिक आर्यभाषाओं का विकास हुआ।
  • अपभ्रंश नाम संस्कृत आचार्यों का दिया हुआ है और इसके कवियों ने अपनी भाषा को ‘भासा’ कहा है।
  • अपभ्रंश के रूप और प्रयोग प्रथम शतक से निश्चित प्रचलन में आ चुके थे और वररुचि के प्राकृत-प्रकाश में वर्णित साहित्यिक प्राकृत से प्राचीनतर हैं।
  • यह मानना गलत है कि अपभ्रंश का जन्म भी इन्हीं तीन सौ वर्षों में हुआ था
  • आधुनिक भाषाओं में संस्कृत शब्दों का पुनरागमन हुआ, जबकि अपभ्रंश में वे लगभग अनुपस्थित हो चुके थे।

भाषा में केंद्रीय और मानक रूप का धारण

  • कालान्तर में केंद्रीय और मानक भाषा बनने वाली परिनिष्ठित साहित्यिक भाषा स्थिर होकर लोकसामान्य की समझ से बाहर हो जाती है।
  • जीवन्त लोकभाषा का स्वरूप निरन्तर गतिशील रहता है और राजनीतिक-आर्थिक कारणों से केंद्रीय भाषा के आसन पर कोई और बोली बैठ जाती है।
  • प्राकृतों की संख्या चार बताई गई है: महाराष्ट्री, शौरसेनी, पैशाची और मागधी, जिनमें महाराष्ट्री को मूल प्राकृत माना गया है।
  • शौरसेनी पश्चिमी हिन्दी है और मागधी बिहार और बंगाल की भाषाओं का पूर्व रूप है।
  • अपभ्रंश और आभीरजन: अपभ्रंश को आभीरजन की भाषा माना गया और आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने भरत मुनि के नाट्यशास्त्र का उल्लेख किया है।

संस्कृत में आभीर- अहीर

  • संस्कृत शब्द आभीर का प्राकृत भाषा में अहीर हो जाता है।
  • वे यदुवंशी, ग्वालवंशी और गोपालों के साथ अभिन्न माने गए हैं।
  • आभीरों के हाथ में राजसत्ता आने पर अपभ्रंश को साहित्यिक भाषा के रूप में समादर प्राप्त हुआ।
  • आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार, नवीं शताब्दी में अपभ्रंश सौराष्ट्र से मगध तक फैल चुकी थी और लोकभाषा बन गई थी।
  • हेमचन्द्राचार्य ने अपने शब्दानुशासन में अपभ्रंश का व्याकरण भी सम्मिलित किया।
  • हेमचन्द्राचार्य का व्याकरण एक ही अपभ्रंश की चर्चा करता है, क्योंकि व्याकरण में बँधने लायक भाषा एक सुस्थिर मानक रूप ले चुकी थी।
  • आधुनिक भाषाओं के पूर्व रूप अनेक प्राकृत भाषाएँ इन रूपान्तरों से गुजरी होंगी और अनेक अपभ्रंशों का अस्तित्व रहा होगा।

अपभ्रंश का साहित्य

  • अपभ्रंश के साहित्य को भाषाकाव्य कहने का चलन था, लेकिन इसका वस्तुतः प्राप्त साहित्य बहुत ज्यादा नहीं है।
  • बाद में पता चला कि जिन पुस्तकों को प्राकृत की रचना समझा जाता था, उनमें से बहुत अपभ्रंश की थीं।
  • जैन ग्रन्थ: जैन भण्डारों में अनेक अपभ्रंश पुस्तकें मिलीं, जो जैन धर्मावलम्बियों द्वारा जैनधर्मी सिद्धान्तों के विषय में लिखित थीं।
  • इन कवियों में स्वयम्भू, पुष्पदन्त, धनपाल, जोइन्दु, मुनि रामसिंह के नाम प्रमुख हैं।
  • आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने अनेक जैन रचनाओं के नाम गिनाए हैं और हेमचन्द्र भी जैन आचार्य थे।
  • इतर स्रोतों से प्राप्त अपभ्रंश रचनाएँ: प्राकृतपैंगलम् में अपभ्रंश कविताएँ और अब्दुलरहमान का संदेशरासक विरहकाव्य है। बौद्ध गान ओ दोहाकोश में संकलित दोहा की भाषा में पूर्वी भाषा के चिह्नों के कारण उसे बाँगला, मैथिली, मगही, भोजपुरी, ओड़िया का भी पूर्वरूप माना गया।

संधा भाषा अथवा उलटबाँसियाँ

  • उलटबाँसी शैली शैव नाथपन्थियों की शैली के समान है और उलटबाँसी की परम्परा हिन्दी में निर्गुण सन्तों तक चलती रही
  • निष्कर्ष: और पूर्वी सिरे पर मागधी हिन्दी की पूर्ववर्ती प्राकृतें रही हैं।
  • ये दोनों हिन्दी साहित्य के दो भिन्न भाषिक मूल हैं और इन दोनों प्रकार के साहित्य में दो भिन्न आर्यजातियों के रचे हुए साहित्य के संस्कार हैं
  • पश्चिमी अपभ्रंश से चारण काव्य की राजस्तुति और पूर्वी अपभ्रंश से निरगुनियाँ सन्तों की विचारधारा आई।
  • आधुनिक भाषाओं में संस्कृत शब्दों का पुनरागमन हुआ।
  • हिंदी साहित्य के आदिकाल में विषयवस्तु और संवेदना के साथ अपभ्रंश का भाषागत उत्तराधिकार भी पाया गया, जो आगे चलकर हिंदी भाषी प्रदेश की अनेक बोलियों में विकसित हुआ।

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