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Questions and Answers
छात्रों को समुवचि पुस्तिकाओं के चयन में किस चीज़ की सहायता मिलती है?
छात्रों को समुवचि पुस्तिकाओं के चयन में किस चीज़ की सहायता मिलती है?
- सरकारी नीतियों का पालन करना
- सोशल मीडिया उपयोग करना
- मूल्यांकन करना (correct)
- पारिवारिक परंपराएँ बनाई रखना
क्या सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि शिक्षा के उद्देश्य पूरे हों?
क्या सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि शिक्षा के उद्देश्य पूरे हों?
- कक्षा में शांति बनाए रखना
- पुनरावृत्ति करते रहना
- प्रभापूर्ण ढंग से पाठ्यक्रम का निर्माण करना (correct)
- अध्यापक और छात्र का बहिष्कार करना
सफलता पाने के लिए छात्रों को किस पर बल देने का सुझाव दिया गया है?
सफलता पाने के लिए छात्रों को किस पर बल देने का सुझाव दिया गया है?
- समाजोपयोगी उत्पादन और अनुभव पर (correct)
- प्रतिस्पर्धा का सामना करने पर
- पारिवारिक उम्मीदों पर
- व्यक्तिगत लाभ पर
शिक्षकों को किस बात की जानकारी होनी चाहिए?
शिक्षकों को किस बात की जानकारी होनी चाहिए?
एक आदर्श पाठ्यक्रम का क्या मुख्य उद्देश्य होना चाहिए?
एक आदर्श पाठ्यक्रम का क्या मुख्य उद्देश्य होना चाहिए?
शिक्षा को जीवन से जोड़ने के लिए छात्रों को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
शिक्षा को जीवन से जोड़ने के लिए छात्रों को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
अध्यापक और छात्र दोनों के लिए सही दिशा में जाने से क्या लाभ होता है?
अध्यापक और छात्र दोनों के लिए सही दिशा में जाने से क्या लाभ होता है?
किस स्थिति में एक अच्छे पाठ्यक्रम का निर्माण संभव हो सकता है?
किस स्थिति में एक अच्छे पाठ्यक्रम का निर्माण संभव हो सकता है?
छात्रों को सही दिशा में जाने के लिए क्या आवश्यक है?
छात्रों को सही दिशा में जाने के लिए क्या आवश्यक है?
पाठ्यचयाा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पाठ्यचयाा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पाठ्यचयाा और पाठ्यक्रम में कौन सा कथन उचित है?
पाठ्यचयाा और पाठ्यक्रम में कौन सा कथन उचित है?
पाठ्यचयाा की परिभाषा में मुख्य घटक क्या है?
पाठ्यचयाा की परिभाषा में मुख्य घटक क्या है?
पाठ्यचयाा के संदर्भ में 'कुरिकुलम' शब्द का अर्थ क्या है?
पाठ्यचयाा के संदर्भ में 'कुरिकुलम' शब्द का अर्थ क्या है?
पाठ्यचयाा का एक महत्व क्या है?
पाठ्यचयाा का एक महत्व क्या है?
पाठ्यचयाा में ज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक पक्ष किस प्रकार शामिल होते हैं?
पाठ्यचयाा में ज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक पक्ष किस प्रकार शामिल होते हैं?
पाठ्यचयाा के विकास में कौन सा पहलू सबसे महत्वपूर्ण होता है?
पाठ्यचयाा के विकास में कौन सा पहलू सबसे महत्वपूर्ण होता है?
पाठ्यचयाा के दौरान प्रमुख चुनौती क्या हो सकती है?
पाठ्यचयाा के दौरान प्रमुख चुनौती क्या हो सकती है?
पाठ्यचयाा का कौन सा हिस्सा सभी छात्रों के लिए सामान्य है?
पाठ्यचयाा का कौन सा हिस्सा सभी छात्रों के लिए सामान्य है?
पाठ्यचयाा का एक महत्वपूर्ण कार्य क्या है?
पाठ्यचयाा का एक महत्वपूर्ण कार्य क्या है?
समुवचि पुस्तिकाओं के चयन से छात्रों को कौन सी सुविधा प्राप्त होती है?
समुवचि पुस्तिकाओं के चयन से छात्रों को कौन सी सुविधा प्राप्त होती है?
पाठ्यक्रम का प्रभावी निर्माण किस स्थिति में संभव है?
पाठ्यक्रम का प्रभावी निर्माण किस स्थिति में संभव है?
अध्यापक और छात्र के बीच सही दिशा में जाने से निम्नलिखित में से क्या लाभ होता है?
अध्यापक और छात्र के बीच सही दिशा में जाने से निम्नलिखित में से क्या लाभ होता है?
शिक्षा और समाजोपयोगी उत्पादन के बीच संबंध को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है?
शिक्षा और समाजोपयोगी उत्पादन के बीच संबंध को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है?
आदर्श पाठ्यक्रम का कौन सा गुण सभी छात्रों के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करता है?
आदर्श पाठ्यक्रम का कौन सा गुण सभी छात्रों के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करता है?
शिक्षा में वास्तविक जीवन के अनुभवों को जोड़ने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
शिक्षा में वास्तविक जीवन के अनुभवों को जोड़ने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
किस स्थिति में पाठ्यक्रम का निर्माण प्रभावी नहीं होगा?
किस स्थिति में पाठ्यक्रम का निर्माण प्रभावी नहीं होगा?
पाठ्यक्रम का चयन करते समय शिक्षकों की क्या भूमिका होती है?
पाठ्यक्रम का चयन करते समय शिक्षकों की क्या भूमिका होती है?
रचनात्मक शिक्षा का मुख्य आधार क्या है?
रचनात्मक शिक्षा का मुख्य आधार क्या है?
शिक्षण प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य क्या होना चाहिए?
शिक्षण प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य क्या होना चाहिए?
पाठ्यचयाा किस प्रकार से छात्रों और अध्यापकों के बीच संबंध स्थापित करता है?
पाठ्यचयाा किस प्रकार से छात्रों और अध्यापकों के बीच संबंध स्थापित करता है?
पाठ्यचयाा और पाठ्यक्रम का क्या मुख्य अंतर है?
पाठ्यचयाा और पाठ्यक्रम का क्या मुख्य अंतर है?
पाठ्यचयाा की व्याख्या किस रूप में होती है?
पाठ्यचयाा की व्याख्या किस रूप में होती है?
किसके अनुसार पाठ्यचयाा विद्यालय के समस्त गतिविधियों का केंद्र होता है?
किसके अनुसार पाठ्यचयाा विद्यालय के समस्त गतिविधियों का केंद्र होता है?
पाठ्यचयाा के विकास में निम्नलिखित में से कौन सा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है?
पाठ्यचयाा के विकास में निम्नलिखित में से कौन सा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है?
किस कारक से पाठ्यचयाा में विविधता आती है?
किस कारक से पाठ्यचयाा में विविधता आती है?
संकीर्ण अर्थ में पाठ्यचयाा का एक अन्य नाम क्या है?
संकीर्ण अर्थ में पाठ्यचयाा का एक अन्य नाम क्या है?
पाठ्यचयाा के विकास का कौन सा पक्ष समाज के लिए महत्वपूर्ण है?
पाठ्यचयाा के विकास का कौन सा पक्ष समाज के लिए महत्वपूर्ण है?
पाठ्यचयाा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है?
पाठ्यचयाा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है?
पाठ्यचयाा और पाठ्यक्रम के विकास में कौन सा तत्व सबसे महत्वपूर्ण है?
पाठ्यचयाा और पाठ्यक्रम के विकास में कौन सा तत्व सबसे महत्वपूर्ण है?
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Study Notes
पाठ्यचर्चा: अवधारणा, अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र और विशेषताएँ
- पाठ्य चर्चा कक्षा के जिज्ञासु कार्य और विद्यालय के सभी क्रियाकलापों को संचालित करने वाला एक ढाँचा होता है।
- यह विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था का केंद्र-बिंदु है।
- विद्यालय में उपलब्ध सभी संसाधन, जैसे भवन, उपकरण, पुस्तकालय की पुस्तकें और अन्य शिक्षण सामग्री, का एकमात्र उद्देश्य पाठ्यचर्चा के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता देना है।
- पाठ्य चर्चा शिक्षा का आधार है। यह शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति करता है।
- यह ऐसा साधन है जो छात्र और अध्यापक को जोड़ता है।
- अध्यापक पाठ्य चर्चा के माध्यम से छात्रों के मानसिक, शारीरिक, नैतिक, सांस्कृतिक, सृजन-ात्मक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास के लिए प्रयास करता है।
पाठ्य चर्चा और पाठ्यक्रम में अंतर
- पाठ्य चर्चा शैक्षणिक व्यवस्था का अनिवार्य एवम् महत्वपूर्ण अंग है।
- लोग पाठ्य चर्चा (Syllabus), विषय-वस्तु (यह शब्द अलग-अलग अर्थ और संदर्भों को दर्शाता है), कोर्स ऑफ़ स्टडी या ऐसे ही नामों से भी संबोधित करते हैं।
- पाठ्य चर्चा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - पाठ्य और चर्चा। पाठ्य का अर्थ है पढ़ने योग्य या पढ़ाने योग्य और चर्चा का अर्थ है नियम-पूर्वक अनुसरण।
- पाठ्यक्रम में केवल ज्ञानात्मक पक्ष से संबंधित तथ्य ही क्रमबद्ध होते हैं।
- पाठ्य चर्चा व्यापक अवधारणा है जबकि पाठ्यक्रम सीमित अवधारणा है।
- पाठ्य चर्चा में नियमित शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विद्यालय और विद्यालय से बाहर, सब-कुछ शामिल होता है जबकि पाठ्यक्रम में विद्यालय की सीमा में कक्षा के भीतर विकसित किए जाने वाले विभिन्न विषयों के ज्ञान की रूपरेखा होती है।
- पाठ्य चर्चा का प्रयोग कक्षा विशेष के संदर्भ में होता है, जैसे कक्षा 8 के लिए हिंदी का पाठ्य चर्चा। परंतु पाठ्यक्रम का प्रयोग कक्षा विशेष के किसी विषय विशेष के लिए होता है, जैसे कक्षा 8 के लिए हिंदी का पाठ्यक्रम।
- पाठ्य चर्चा संपूर्ण शैक्षिक जीवन की चर्चा है जबकि पाठ्यक्रम पठनीय वस्तुओं का केवल एक क्रम है।
- पाठ्य चर्चा अपने आप में संपूर्ण है, जबकि पाठ्यक्रम पाठ्य चर्चा का एक अंग है।
- पाठ्य चर्चा से संपूर्ण व्यक्ति का विकास संभव है, जबकि पाठ्यक्रम से व्यक्ति के किसी एक पक्ष या किसी एक अंग का ही विकास संभव है।
- पाठ्य चर्चा और पाठ्यक्रम में पूर्ण और अंश का भेद होता है।
पाठ्य चर्चा: प्रकृति
- पाठ्य चर्चा के लक्ष्य या प्रयोजन उससे संबंधित शैक्षणिक उद्देश्यों से निर्धारित होते हैं।
- अध्यापक अपनी कक्षा के सभी विद्यार्थियों के लिए एक ही प्रकार के अनुभवों का आयोजन करता है।
- प्रत्येक विद्यार्थी की विशिष्ट पाठ्य चर्चा उस कक्षा के अन्य विद्यार्थियों की पाठ्य चर्चा से भिन्न होती है।
- किसी दी गई पाठ्य चर्चा के उद्देश्यों, आधार और मापदंड की दृष्टि से अध्यापक में उपयुक्त व्यावसायिक निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए।
- अध्यापक को कक्षा में िर्फ़ लोचिली व्यवस्था प्रदान करनी होती है बल्कि अनुभव के लिए सार्थक विकल्प भी खोजने पड़ते हैं।
पाठ्य चर्चा: क्षेत्र और विशेषताएँ
- पाठ्य चर्चा के माध्यम से शिक्षा की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है।
- शिक्षा के किस स्तर (पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च) पर किन विषयों को पढ़ाना है, किन क्रियाओं को सिखाना है और किन अनुभवों को देना है, यह सभी बातें पाठ्य चर्चा में स्पष्ट रूप से दी जाती हैं।
- पाठ्य चर्चा उपलब्ध होने से आवश्यक और सही पाठ्य सामग्री को पुस्तक की रचना समय ध्यान में रखा जाता है।
- पाठ्य चर्चा छात्र और अध्यापक दोनों को सही दिशा बोध कराती है, जिससे समय और शक्ति का अपव्यय नहीं होता।
- एक जनित स्तर के लिए एक जनित पाठ्य चर्चा होने से पूरे प्रदेश या देश में शैक्षणिक स्तर की समानता और एकरूपता बनी रहती है।
- मूल्यांकन के लिए पाठ्य चर्चा एक जनित आधार प्रदान करती है।
- पाठ्य चर्चा से उद्देश्यों की प्राप्ति सभी बिंदुओं पर होती है।
- पाठ्य चर्चा से समय और शक्ति का सदुपयोग होता है।
पाठ्य चर्चा: विशेषताएँ
- शिक्षक के लिए महत्वपूर्ण
- शिक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण
- समाज के लिए महत्वपूर्ण
- सांस्कृतिक उन्नयन के लिए महत्वपूर्ण
- आदर्शों के विकास के लिए महत्वपूर्ण
पाठ्य चर्चा का अनुभव के साथ संबंध
- पाठ्य चर्चा छात्र और अध्यापक दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण अंग होती है।
- यह छात्र के व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक होती है। इस से छात्र सामाजिकरण की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हो जाते हैं
- पाठ्य चर्चा यह निर्धारित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि विभिन्न मानसिक स्तर के विद्यालयों में पढ़ने वाले बालकों के उनके मानसिक स्तर के अनुकूल कौन सी क्रियाएँ सिखाना है और कौन सी नहीं?
- यह छात्रों को समुचित पुस्तकों के निर्माण और चयन में सहायक होती है।
- इससे छात्रों को अपना मूल्यांकन करने में आसानी होती है।
- यह छात्रों को समाजोपयोगी उत्पादन करने और अनुभव पर बल देकर शिक्षा को जीवन से जोड़ने के लिए प्रेरित करती है।
- इससे शिक्षक यह जान सकते हैं कि क्या पढ़ाना है? क्या सिखाना है? और क्या अनुभव देना है?
- इससे छात्र और अध्यापक दोनों को सही दिशा बोध कराने से समय और शक्ति की बचत होती है।
- शिक्षा के उद्देश्य सभी पूर्ण होते हैं जबकि जब पाठ्य चर्चा का निर्माण और कार्यान्वयन प्रभावी ढंग से होता है।
पाठ्यचर्या: परिचय
- पाठ्यचर्या कक्षा के आस-पास सभी गतिविधियों को एक साथ जोड़ती है।
- यह स्कूल की शिक्षा प्रणाली का केंद्र बिंदु है।
- स्कूल में उपलब्ध सभी संसाधन, जैसे स्कूल भवन, उपकरण, पुस्तकालय, और अन्य शिक्षण सामग्री पाठ्यचर्या को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करते हैं।
- पाठ्यचर्या शिक्षा का आधार है। इसके ज़रिए शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। यह एक ऐसे साधन के रूप में है जो छात्र और अध्यापक को जोड़ता है।
- अध्यापक पाठ्यचर्या के माध्यम से छात्रों के मानसिक, शारीरिक, नैतिक, सांस्कृतिक, संज्ञानात्मक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास में योगदान देता है।
पाठ्यचर्या की परिभाषाएँ
- कनिंघम के अनुसार, "पाठ्यचर्या कलाकार (अध्यापक) के हाथ में वो साधन (उपकरण) है जिसके माध्यम से वह अपने पदार्थ रूपी विषय (सामग्री) को अपने कलाधृष्टि रूपी स्कूल (स्टूडियो) में अपने आदर्श (उद्देश्य) के अनुसार आकार (ढाल) प्रदान करता है"।
पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम में अंतर
- पाठ्यचर्या शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञों के बीच इसके बारे में एकमत नहीं है। पाठ्यचर्या को "पाठ्यचर्या" या "विषयवस्तु" कहा जाता है। इन दोनों शब्दों के अलग-अलग अर्थ और संदर्भ हैं। पाठ्यचर्या को व्यापक, संक्षिप्त और सटीक तीनों अर्थों में समझना चाहिए।
- पाठ्यचर्या शब्द "पाठ्य" और "चर्या" से मिलकर बना है। "पाठ्य" का मतलब है पढ़ने योग्य या सिखाने योग्य, और "चर्या" का मतलब है नियम और निर्देशों का पालन करना। इसलिए, पाठ्यचर्या का मतलब पढ़ने योग्य या सिखाने योग्य विषयवस्तु और क्रियाओं का नियमों का पालन करते हुए अनुसरण करना।
- अंग्रेजी में पाठ्यचर्या के लिए "Curricu।um" शब्द का प्रयोग किया जाता है। यह लैटिन भाषा के "Currere" शब्द से बना है, जिसका अर्थ है रनवे या रेस कोर्स - दौड़ का रास्ता या क्षेत्र - किसी निश्चित लक्ष्य तक पहुँचने के लिए मार्ग पर दौड़ना। इस प्रकार शाब्दिक अर्थ में पाठ्यचर्या छात्रों के लिए दौड़ का रास्ता या दौड़ के मैदान के समान है, जिस पर चलते हुए वे अपने शिक्षण लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं।
- पाठ्यचर्या में शिक्षा के संज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक तीनों पक्ष शामिल होते हैं।
पाठ्यक्रम
- संकुचित अर्थ में, पाठ्यचर्या के लिए "Syllabus" या पाठ्यक्रम शब्द का भी प्रयोग होता है, जिसका अर्थ अध्ययन का कार्यक्रम या परिचय होता है।
- "पाठ्यक्रम" दो शब्दों से मिलकर बना है: "पाठ्य" + "क्रम" - अर्थात किसी विषय या अध्ययन की विषयवस्तु जो क्रम से व्यवस्थित हो।
- पाठ्यक्रम में केवल संज्ञानात्मक पक्ष से संबंधित तथ्य क्रमबद्ध होते हैं।
- पाठ्यचर्या व्यापक अवधारणा है, जबकि पाठ्यक्रम सीमित अवधारणा है।
- पाठ्यचर्या में निर्धारित शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विद्यालय और विद्यालय से बाहर, जो कुछ भी संपन्न किया जाता है, सब शामिल होता है, जबकि पाठ्यक्रम विद्यालय की सीमा में कक्षा के भीतर विकसित किए जाने वाले विभिन्न विषयों के ज्ञान की रूपरेखा मात्र होती है।
- पाठ्यचर्या शब्द का प्रयोग कक्षा विशेष के संदर्भ में किया जाता है। जैसे, कक्षा 8 के लिए हिंदी का पाठ्यचर्या; लेकिन पाठ्यक्रम शब्द का प्रयोग कक्षा विशेष के किसी विषय विशेष के लिए होता है। जैसे, कक्षा 8 के लिए हिंदी का पाठ्यक्रम।
- पाठ्यचर्या पूरी विद्यालयी जीवन की चर्या होती है, जबकि पाठ्यक्रम पढ़ने योग्य विषयवस्तु का एक क्रम होता है।
- पाठ्यचर्या स्वयं में संपूर्ण होती है, जबकि पाठ्यक्रम पाठ्यचर्या का एक अंग मात्र होता है।
- पाठ्यचर्या से संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास संभव होता है, जबकि पाठ्यक्रम से व्यक्तित्व के किसी एक पक्ष या किसी एक अंग का विकास संभव होता है।
- पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम में पूरा और अंश का भेद होता है।
पाठ्यचर्या की प्रकृति
- पाठ्यचर्या के लक्ष्य या प्रयोजन से संबंधित शिक्षण उद्देश्यों द्वारा निर्धारित होते हैं।
- अध्यापक अपनी कक्षा के सभी विद्यार्थियों के लिए एक ही प्रकार के अधिगम अनुभवों का आयोजन करता है, लेकिन अपने अधिगम अनुभवों के विषय और गुणवत्ता के कारण छात्रों में वैयक्तिक भिन्नता देखने को मिलती है। इसमें वैयक्तिक भेद और सामाजिक पृष्ठभूमि की विविधता एक प्रकार के परिणाम के लिए उत्तरदायी होते हैं। यही कारण है कि एक ही कक्षा के प्रत्येक छात्र की वास्तविक पाठ्यचर्या उसी कक्षा के अन्य छात्रों की पाठ्यचर्या की अपेक्षा भिन्न होती है।
- दी गई पाठ्यचर्या के उद्देश्य, आधार और मापदंडों की दृष्टि से अध्यापक में उपयुक्त व्यावसायिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित होनी चाहिए। प्रत्येक अधिगम क्रिया की अपनी वास्तविक पाठ्यचर्या के परिणामस्वरूप निर्धारित पाठ्यचर्या और क्रियात्मक पाठ्यचर्या के बीच पाए जाने वाले अंतर के कारण अध्यापक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उसे कक्षा में न केवल लचीली व्यवस्था प्रदान करनी होती है बल्कि अधिगम के सफल विकल्प भी खोजने पड़ते हैं।
पाठ्यचर्या: क्षेत्र और विशेषताएं
- पाठ्यचर्या के माध्यम से शिक्षा की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है। शिक्षा के किस स्तर (पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च ) पर किन पाठ्य विषयों को पढ़ाना है, किन क्रियाओं को सिखाना है, और कौन से अनुभव देना है - ये सभी बातें पाठ्यचर्या में स्पष्ट रूप से दी जाती हैं।
- पाठ्यचर्या के उपलब्ध हो जाने से आवश्यक और सटीक पाठ्यसामग्री को पुस्तक की रचना के समय ध्यान में रखा जाता है। इससे उपयुक्त और स्तरीय पुस्तकों का निर्माण हो पाता है जिनसे बालक के विकास में सहायता मिलती है।
- पाठ्यचर्या छात्र और अध्यापक दोनों को सही दिशा प्रदान करती है। इससे समय और शक्ति का अपव्यय नहीं होता।
- एक जनसंख्या स्तर के लिए एक जनसंख्या पाठ्यचर्या होने से पूरे प्रदेश या देश में शिक्षण स्तर की समानता और एकरूपता बनी रहती है। जब किसी नए विषय की पढ़ाई किसी शिक्षा संस्था में प्रारंभ हो जाती है या कोई नई योजना लागू की जाती है तो उससे पहले पाठ्यचर्या को ही निर्धारित करना पड़ता है।
- मूल्यांकन के लिए पाठ्यचर्या एक मूल आधार प्रदान करती है।
- पाठ्यचर्या से उद्देश्यों की प्राप्ति सम्भव होती है।
- पाठ्यचर्या से समय और शक्ति का सदुपयोग होता है।
पाठ्यचर्या: विशेषताएं
- शिक्षक के लिए महत्वपूर्ण
- शिक्षाविदों के लिए महत्वपूर्ण
- समाज के लिए महत्वपूर्ण
- सांस्कृतिक उन्नयन के लिए महत्वपूर्ण
- अविष्कार के विकास के लिए महत्वपूर्ण
पाठ्यचर्या का अधिगम से संबंध
- पाठ्यचर्या छात्र और अध्यापक दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण अंग होती है। यह छात्र के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक होती है। इससे छात्र समाजीकरण की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हो जाते हैं।
- पाठ्यचर्या यह निर्धारित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि विभिन्न मानसिक स्तर के विद्यालयों में पढ़ने वाले बालकों के अपने मानसिक स्तर के अनुकूल कौन सी क्रियाएँ सिखाना है और कौन सी नहीं? यह छात्रों को समुचित पुस्तकों के निर्माण और चयन में सहायक होती है।
- इससे छात्रों को अपना मूल्यांकन करने में सुगमता होती है। यह छात्रों को समाजोपयोगी उत्पादन करने और कार्यानुभव पर बल देकर शिक्षा को जीवन से जोड़ने के लिए प्रेरित करती है।
- इससे क्या पढ़ाना है? क्या सिखाना है? क्या कार्यानुभव देना है? यह शिक्षक ज्ञात कर सकते हैं। इससे छात्र और अध्यापक दोनों को सही दिशा प्रदान करने से समय और शक्ति की बचत हो जाती है।
- शिक्षा के उद्देश्य भी पूरे होते हैं, जबकि पाठ्यचर्या का निर्माण और क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से होता है। और यह निर्माण और क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से भी हो सकता है जबकि अध्यापक और छात्र जागरूक और उत्साही हो और लगन के साथ इस कार्य में भाग लें।
- आदर्श पाठ्यचर्या वह है जो प्रत्येक छात्र का सर्वंगीण विकास कर सके, परंतु ऐसी पाठ्यचर्या का निर्माण अभी तो कोरी कल्पना है। यह कार्य भी सम्भव है जबकि प्रत्येक अध्यापक प्रत्येक छात्र के लिए अलग-अलग पाठ्यचर्या का निर्माण करे।
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