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Questions and Answers
विशेषण संस्कृत व्याकरण में एक प्रकार का शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम को परिवर्तित या वर्णित करता है。
विशेषण संस्कृत व्याकरण में एक प्रकार का शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम को परिवर्तित या वर्णित करता है。
True
विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के साथ वचन, लिंग और कारक में सहमत होता है ।
विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के साथ वचन, लिंग और कारक में सहमत होता है ।
True
विशेषण केवल संज्ञा को परिवर्तित करता है ।
विशेषण केवल संज्ञा को परिवर्तित करता है ।
False
साधारण विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के सामान्य गुणों का वर्णन करता है ।
साधारण विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के सामान्य गुणों का वर्णन करता है ।
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विशिष्ट विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के सामान्य गुणों का वर्णन करता है ।
विशिष्ट विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के सामान्य गुणों का वर्णन करता है ।
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सांश्रायिक विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के संबंध का वर्णन करता है ।
सांश्रायिक विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के संबंध का वर्णन करता है ।
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विशेषण सभी संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होता है ।
विशेषण सभी संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होता है ।
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विशेषण संस्कृत साहित्य में विस्तृत और वर्णनात्मक भाषा के लिए प्रयुक्त होता है ।
विशेषण संस्कृत साहित्य में विस्तृत और वर्णनात्मक भाषा के लिए प्रयुक्त होता है ।
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विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के अर्थ को बदल देता है ।
विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के अर्थ को बदल देता है ।
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Study Notes
विशेषण (Visheshan)
Definition
- A विशेषण (Visheshan) is a type of word in Sanskrit grammar that modifies or describes a noun or a pronoun.
- It is also known as an adjective.
Characteristics
- A विशेषण typically agrees with the noun or pronoun it modifies in case, number, and gender.
- It can be used to describe the quality, quantity, or relation of the noun or pronoun.
Types of विशेषण
- साधारण विशेषण (Sādhāraṇa Visheshan): A common adjective that describes a general quality of the noun or pronoun.
- विशिष्ट विशेषण (Vishishṭa Visheshan): A specific adjective that describes a unique or specific quality of the noun or pronoun.
- सांश्रायिक विशेषण (Sāṁśrāyika Visheshan): A possessive adjective that describes the relationship between the noun or pronoun and another noun or pronoun.
Formation of विशेषण
- Many विशेषण are formed by adding suffixes to the root of a noun or verb.
- Examples:
- कृप (kṛpa) + अ (a) = कृपा (kṛpā) meaning "compassionate"
- शूर (śūra) + इ (i) = शूरी (śūrī) meaning "valiant"
Importance of विशेषण
- विशेषण help to add detail and nuance to a sentence or phrase.
- They can change the meaning of a sentence or phrase significantly.
- They are used extensively in Sanskrit literature to create vivid and descriptive language.
विशेषण (Visheshan)
परिभाषा (Definition)
- विशेषण संस्कृत व्याकरण में एक प्रकार का शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम का वर्णन करता है।
- इसे विशेषण के नाम से भी जाना जाता है।
लक्षण (Characteristics)
- विशेषण की विशेषता है कि वह संज्ञा या सर्वनाम के साथ वचन, लिंग और कारक में souhlas करता है।
- वह संज्ञा या सर्वनाम की गुणवत्ता, मात्रा या सम्बन्ध का वर्णन करता है।
प्रकार (Types)
- साधारण विशेषण: संज्ञा या सर्वनाम के सामान्य गुण का वर्णन करता है।
- विशिष्ट विशेषण: संज्ञा या सर्वनाम के विशेष गुण का वर्णन करता है।
- सांश्रायिक विशेषण: संज्ञा या सर्वनाम के सम्बन्ध का वर्णन करता है।
निर्माण (Formation)
- कई विशेषण संज्ञा या क्रिया के मूल के सsuffix जोड़ने से बनते हैं।
- उदाहरण: कृप + अ = कृपा (कृपा) मतलब "करुणामय"
- उदाहरण: शूर + इ = शूरी (शूरी) मतलब "वीर"
महत्व (Importance)
- विशेषण वाक्य या अभिव्यक्ति को विस्तृत और सूक्ष्म बनाते हैं।
- वे वाक्य या अभिव्यक्ति के अर्थ में काफी बदलाव लाते हैं।
- वे संस्कृत साहित्य में विस्तृत और सजीव भाषा के लिएกว्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं।
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Description
विशेषण क्या है? विशेषण के प्रकार तथा उसके गुण। Learn about Visheshan in Sanskrit grammar, its types, and characteristics.