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Questions and Answers
धारा 370 भारतीय संविधान का क्या था?
धारा 370 भारतीय संविधान का क्या था?
- अध्याय
- अनुसूची
- अनुच्छेद
- धारा (correct)
अनुच्छेद 370 कब लागू हुआ था?
अनुच्छेद 370 कब लागू हुआ था?
- 17 नवंबर, 1956 (correct)
- 15 अगस्त, 1947
- 5 अगस्त, 2019
- 26 जनवरी, 1950
अनुच्छेद 370 के तहत, भारतीय संसद को जम्मू और कश्मीर के किन क्षेत्रों में कानून बनाने का अधिकार था?
अनुच्छेद 370 के तहत, भारतीय संसद को जम्मू और कश्मीर के किन क्षेत्रों में कानून बनाने का अधिकार था?
- शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि
- वित्त, वाणिज्य और उद्योग
- रक्षा, विदेश मामले और संचार (correct)
- सभी क्षेत्रों में
धारा 370 को कब निरस्त किया गया था?
धारा 370 को कब निरस्त किया गया था?
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू और कश्मीर को कितने केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया?
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू और कश्मीर को कितने केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया?
धारा 370 को निरस्त करने का मुख्य उद्देश्य क्या था?
धारा 370 को निरस्त करने का मुख्य उद्देश्य क्या था?
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले, जम्मू और कश्मीर के नागरिकों के पास क्या था?
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले, जम्मू और कश्मीर के नागरिकों के पास क्या था?
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू और कश्मीर में विकास की गति में क्या बदलाव आया है?
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू और कश्मीर में विकास की गति में क्या बदलाव आया है?
1947 में भारत में शामिल होने का फैसला किसने किया था?
1947 में भारत में शामिल होने का फैसला किसने किया था?
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के निर्णय को कहाँ चुनौती दी गई है?
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के निर्णय को कहाँ चुनौती दी गई है?
Flashcards
धारा 370 क्या थी?
धारा 370 क्या थी?
भारतीय संविधान का एक अनुच्छेद, जो जम्मू और कश्मीर को विशेष अधिकार देता था।
किन क्षेत्रों में भारतीय संसद कानून बना सकती थी?
किन क्षेत्रों में भारतीय संसद कानून बना सकती थी?
रक्षा, विदेश मामले, और संचार।
धारा 370 कब निरस्त की गई?
धारा 370 कब निरस्त की गई?
5 अगस्त, 2019
धारा 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर को किन दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया?
धारा 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर को किन दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया?
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धारा 370 को निरस्त करने के मुख्य कारण क्या थे?
धारा 370 को निरस्त करने के मुख्य कारण क्या थे?
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धारा 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर में क्या बदलाव आए?
धारा 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर में क्या बदलाव आए?
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धारा 370 का इतिहास क्या है?
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धारा 370 को निरस्त करने का कानूनी मुद्दा क्या है?
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Study Notes
धारा 370: सारांश
- धारा 370 भारतीय संविधान का एक अनुच्छेद था, जिसने जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्तता दी।
- यह 17 नवंबर, 1956 से लागू हुआ।
- इसने जम्मू और कश्मीर को अपना संविधान बनाने की शक्ति दी।
- भारतीय संसद को जम्मू और कश्मीर के लिए केवल रक्षा, विदेश मामले और संचार से जुड़े कानून बनाने का अधिकार था।
- अन्य सभी मामलों में, राज्य सरकार की सहमति अनिवार्य थी।
- 5 अगस्त, 2019 को, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया।
- इसके साथ ही, जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया: जम्मू और कश्मीर, और लद्दाख।
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय भारत सरकार द्वारा लिया गया एक ऐतिहासिक निर्णय था।
- इस निर्णय का लक्ष्य जम्मू और कश्मीर को भारत के बाकी हिस्सों के साथ एकीकृत करना था।
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू और कश्मीर में कई परिवर्तन हुए हैं।
- भारतीय संविधान और कानून अब जम्मू और कश्मीर में पूरी तरह से लागू हैं।
- जम्मू और कश्मीर के लोगों को अब वे सभी अधिकार प्राप्त हैं जो भारत के अन्य नागरिकों को प्राप्त हैं।
धारा 370 के मुख्य प्रावधान
- जम्मू और कश्मीर को अपना संविधान बनाने का अधिकार था।
- भारतीय संसद को जम्मू और कश्मीर के लिए केवल रक्षा, विदेश मामले और संचार के क्षेत्रों में कानून बनाने का अधिकार था।
- अन्य सभी मामलों में, राज्य सरकार की सहमति आवश्यक थी।
- जम्मू और कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता थी।
- जम्मू और कश्मीर में संपत्ति खरीदने के लिए भारत के अन्य नागरिकों को राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती थी।
धारा 370 को निरस्त करने के कारण
- भारत सरकार का मानना था कि अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर के विकास में बाधा बन रहा था।
- सरकार का यह भी मानना था कि यह अनुच्छेद आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा था।
- सरकार का मकसद जम्मू और कश्मीर को भारत के बाकी हिस्सों के साथ जोड़ना था।
धारा 370 को निरस्त करने के बाद के बदलाव
- भारतीय संविधान और कानून अब जम्मू और कश्मीर में पूरी तरह से लागू हैं।
- जम्मू और कश्मीर के लोगों को अब वे सभी अधिकार प्राप्त हैं जो भारत के अन्य नागरिकों को प्राप्त हैं।
- जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया है: जम्मू और कश्मीर, और लद्दाख।
- जम्मू और कश्मीर में विकास की गति तेज हुई है।
- आतंकवाद और अलगाववाद में कमी आई है।
धारा 370 पर प्रतिक्रियाएं
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के निर्णय का भारत में व्यापक रूप से समर्थन किया गया।
- हालांकि, कुछ लोगों ने इस फैसले की आलोचना की है।
- उनका मानना है कि यह निर्णय जम्मू और कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात है।
- पाकिस्तान ने भी इस फैसले की कड़ी निंदा की है।
- उनका दावा है कि यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन है।
धारा 370 का इतिहास
- अनुच्छेद 370 को 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए विभाजन के बाद बनाया गया था।
- उस समय, जम्मू और कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने का फैसला किया था।
- हालांकि, उन्होंने कुछ शर्तों के साथ भारत में शामिल होने का फैसला किया।
- इन शर्तों में से एक यह थी कि जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्तता दी जाएगी।
- अनुच्छेद 370 इन शर्तों को लागू करने के लिए बनाया गया था।
धारा 370 पर विवाद
- अनुच्छेद 370 हमेशा से ही विवाद का विषय रहा है।
- कुछ लोगों का मानना था कि यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर के विकास में बाधा डाल रहा था।
- उनका यह भी मानना था कि यह अनुच्छेद आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा था।
- अन्य लोगों का मानना था कि यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर के लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- उनका यह भी मानना था कि यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर की पहचान को बनाए रखने में मदद करता है।
धारा 370 का भविष्य
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू और कश्मीर का भविष्य अनिश्चित है।
- यह देखना बाकी है कि यह निर्णय जम्मू और कश्मीर के लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करेगा।
- यह भी देखना बाकी है कि यह निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को कैसे प्रभावित करेगा।
धारा 370 से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
- अनुच्छेद 370 को 5 अगस्त, 2019 को निरस्त कर दिया गया था।
- जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया है: जम्मू और कश्मीर, और लद्दाख।
- भारतीय संविधान और कानून अब जम्मू और कश्मीर में पूरी तरह से लागू होते हैं।
- जम्मू और कश्मीर के लोगों को अब वे सभी अधिकार प्राप्त हैं जो भारत के अन्य नागरिकों को प्राप्त हैं।
- अनुच्छेद 370 हमेशा से ही विवाद का विषय रहा है।
धारा 370 को निरस्त करने का कानूनी मुद्दा
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की वैधता को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
- याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय असंवैधानिक था।
- उनका तर्क है कि अनुच्छेद 370 को केवल जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा द्वारा ही निरस्त किया जा सकता था।
- भारत सरकार का तर्क है कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय पूरी तरह से संवैधानिक था।
- सरकार का तर्क है कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था और इसे कभी भी निरस्त किया जा सकता था।
- सर्वोच्च न्यायालय ने अभी तक इस मामले पर अपना फैसला नहीं सुनाया है।
धारा 370 को निरस्त करने का अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के निर्णय का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव पड़ा है।
- पाकिस्तान ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया है।
- कई अन्य देशों ने भी इस फैसले पर चिंता व्यक्त की है।
- भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त किया है कि यह निर्णय जम्मू और कश्मीर में शांति और स्थिरता लाने के लिए किया गया है।
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