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Questions and Answers
हिंदी भाषा के लिए क्या महत्वपूर्ण विषय है?
हिंदी भाषा के लिए क्या महत्वपूर्ण विषय है?
- व्याकरण (correct)
- भाषा का इतिहास
- संवाद
- लेखन
कौन-कौन से क्षेत्रों पर हिंदी की विरासत है?
कौन-कौन से क्षेत्रों पर हिंदी की विरासत है?
- बिहार, पुन्यंज्यू प्रदेश, जम्मू और कश्मीर
- सोना, बिहार, उत्तर प्रदेश (correct)
- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़
- सोना, पुन्यंज्यू प्रदेश, जम्मू और कश्मीर
हिंदी के व्याकरण में कौन-कौन से संघ ने सहायकता प्रदान की है?
हिंदी के व्याकरण में कौन-कौन से संघ ने सहायकता प्रदान की है?
- भारतीय साहित्यिक संघ
- साहित्यिक संघ
- साहित्यक
- सहायक साहित्यिक परिषद (correct)
हिंदी भाषा के व्याकरण का विकास क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंदी भाषा के व्याकरण का विकास क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंदी भाषा के लिए कौन-कौन से संस्थान महत्वपूर्ण हैं?
हिंदी भाषा के लिए कौन-कौन से संस्थान महत्वपूर्ण हैं?
हिंदी भाषा के व्याकरण में कौन-कौन से प्रकार होते हैं?
हिंदी भाषा के व्याकरण में कौन-कौन से प्रकार होते हैं?
हिंदी के व्याकरण में समग्री की प्रमुखता कौन-सी होनी चाहिए?
हिंदी के व्याकरण में समग्री की प्रमुखता कौन-सी होनी चाहिए?
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Study Notes
हिंदी - A Prominent Language in India
हिंदी (Hindi) एक भारतीय राष्ट्रीय मूल्यांकित ऑर्झिगिनल इंग्लिश भाषा है जो समग्री ओर सोना, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पुन्यंज्यू प्रदेश और जम्मू और कश्मीर स्थानों पर विरासत है। हिंदी भाषा के लिए व्याकरण (Grammar) एक महत्वपूर्ण विषय है, जो हिंदी वित्तीय, साहित्यिक और साहित्यक मूल्यांकित है और वह दिशा-दिशा के बीच की संगति को प्रतिषेधित करता है।
हिंदी के व्याकरण का विकास
हिंदी के व्याकरण का विकास शामिल लिखने के लिए एक बहुमूल्य श्रेणी है। हिंदी भाषा के व्याकरण के लिए भारतीय साहित्यिक संघ विकास पूर्व के साथ विकास करने वाले बहुमूल्य साहित्यिक परिषद और भारतीय साहित्यिक संघ विकास पूर्व के साथ विकास करने वाले सहायक साहित्यिक परिषदों का दिल्चाज है। हिंदी व्याकरण का विकास बहुमूल्य है क्योकि हिंदी व्याकरण की साहित्यिक शब्दओं को प्रतिषेधित करने वाले प्रकार का अनुवाद प्राकृतिक, निर्गुण और साधारण होने वाले साहित्यिक शब्दों के अनुवाद से अलग करता है।
हिंदी के व्याकरण को साहित्यिक प्रासंगिक एवं साहित्यीय होना
हिंदी व्याकरण के साहित्यिक साहित्यिक और साहित्यीय प्रासंगिक का महत्व है क्योकि हिंदी व्याकरण की साहित्यिक शब्दओं को प्रतिषेधित करने वाले प्रकार का अनुवाद प्राकृतिक, निर्गुण और साधारण होने वाले साहित्यिक शब्दों के अनुवाद से अलग करता है। हिंदी व्याकरण के साहित्यिक साहित्यिक और साहित्यीय प्रासंगिक का अहम स्थान है क्योकि हिंदी व्याकरण की साहित्यिक शब्दओं को प्रतिषेधित करने वाले प्रकार के अनुवाद प्राकृतिक, निर्गुण और साधारण होने वाले साहित्यिक शब्दों से अलग रखने से हिंदी भाषा के साहित्यिक प्रासंगिक
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